जो बीत गई सो बात गई - हरिवंश राय बच्चन
जो बीत गई सो बात गई.....!!(हरिवंश राय बच्चन
हरिवंश राय बच्चन श्रीवास्तव उर्फ बच्चन।
जन्म २७ नवम्बर १९०७ बाबूपति ( प्रतापगढ़ जि.)
पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव।
माता: सरस्वती देवी।
पत्नी: श्यामा बच्चन, उनके मृत्यु के बाद तेजी बच्चन से विवाह।
संतान: अमिताभ और अजिताभ।
आरंभिक जीवन
बच्चन जी का जन्म २७ नवम्बर १९०७ को इलाहाबाद से सटे प्रतापगढ़ जिले से एक छोटे से गांव बाबूपट्टी कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रतापनारायण श्री वास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था। इनको बाल्यकाल में बच्चन कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चा या संतान होता है बाद में ये इन्ही नाम से मशहूर हुए। इन्होंने कायस्थ में उर्दू की शिक्षा ली। इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजी मेंं एम.ए और कैंब्रिज विश्व विद्यालय से अंग्रेजी साहित्य से पीएचडी की। !!
"जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक सितारा था,
माना वह बेहद प्यारा था,
वह डूब गया तो डूब गया,
अम्बर के आनन को देखो,
कितने इसके तारे टूटे,
कितने इसके प्यारे छूटे, जो छूट गए फिर कहाँ मिले;
पर बोलो टूटे तारों पर,
कब अम्बर शोक मनाता है,
जो बीत गई सो बात गई"!!
"जीवन में वह था एक कुसुम,।
थे उसपर नित्य निछावर तुम; "वह सूख गया तो सूख गया,
मधुवन की छाती को देखो;
सूखी कितनी इसकी कलियां,
मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ;
जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली,
पर बोलो सूखे फूलों पर;
कब मधुवन शोर मचाता है,
जो बीत गई सो बात गई"!!
"जीवन में मधु का प्याला था,
तुमने तन मन दे डाला था;
वह टूट गया तो टूट गया,
मदिरायल का आँगन देखो;
"कितने प्याले हिल जाते हैं,
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं;
जो गिरते हैं कब उठतें हैं,
पर बोलो टूटे प्यालों पर;
"कब मदिरालय पछताता है,
जो बीत गई सो बात गई
मृदु मिटटी के हैं बने हुए,
मधु घट फूटा ही करते हैं;
"लघु जीवन लेकर आए हैं,
प्याले टूटा ही करते हैं;
फिर भी मदिरालय के अन्दर,
मधु के घट हैं मधु प्याले
"जो मादकता के मारे हैं,
वे मधु लूटा ही करते हैं;
"वह कच्चा पीने वाला है,
जिसकी ममता घट प्यालों पर:
"जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है;
जो बीत गई सो बात गई.....!!
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जो बीत गई सो बात गई कविता का व्याख्या
श्री हरिवंश राय बच्चन जी ने इस कविता के माध्यम से हमे अपने जीवन मे बीती बातें को भुला कर के आगे बढ़ने का प्रेरणा दिया है, कवि का मानना है कि हम सब के जीवन में कोई न कोई ऐसा होता है जिसके होने न होने से हमे बहुत फर्क पड़ता हैं,
लेकिन इसका मतलब ये नही की हम पूरी जिंदगी उस चीज का शोक मनाते रहे इस कविता में कवि ने अंबर का उदाहरण देते हुए हमे ये बतलाने की कोशिश करते हैं की अंबर में उसके बहुत से प्रिय तारे होते हैं जो टूट ते रहते हैं पर अंबर कभी उसका शोक नही मनाता, अर्थात ! इसी गगन के माध्यम से कवि प्रेरणा देनी चाही हैं की मानव के जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव होते हैं लेकिन हमे उसका शोक न मानकर आगे बढ़ना चाहिए..!!
कविता के दूसरे भाग में कवि ने हमे कुसुम से प्रेरणा लेने को कहा है,
इस कविता में कवि ने कुसुम के माध्यम से हमे जीवन के रहस्य को समझने का प्रयत्न करते हैं, की जिस प्रकार उपवन अपने के मुरझाए हुए फूलों को देख कलियों को देखते शोर नहीं मचाता उसी प्रकार मानव को भी अपने जीवन अपनी बीती बातें पे कभी शोक नही मानना चाहिए अर्थात अपने टूटे सपनो पे शोक न माना कर हमे हौसलों के साथ आगे बढ़ना चाहिए, तात्पर्य जो बीत गई उस बातो को भुलाकर आज में जीना चाहिए, और वर्तमान की हमे चिंता करनी चाहिए...!!
कविता के तीसरे भाग में बच्चन जी ने हमे हमारे जीवन की तुलना मदिरालय है से की है,
जब हम जन्म लेते है उसी समय से ही हमारा जीवन मृत्यु की ओर बढ़ने लगता है अर्थात हमारा जन्म ही मृत्यु के लिए होता है, और कवि ने हमारे जीवन की तुलना मदिरालय से करते हुए हमे ये बतलाने की कोशिश की हैं मदिरालय की कितनी सारी प्याली टूट जाते हैं टूट मिट्टी में मिल जाते है जो फिर कभी जुड़ नही पाते पर टूटे प्यालियो पर मदिरा कभी शोक नही मनाता, अर्थात हमारी तुलना मदिरालय से की की गई है हमारा शरीर भी मिट्टी से बनी हुई है जो एक दिन किसी बहाने मिट्टी में मिल ही जाएगी, तात्पर्य हमे जीवन में किसी भी चीज के लिए पछताना नहीं चाहिए , जो बीत गई सो बात गई...!!
बच्चन जी ने कविता के अंतिम चरण में जीवन का उदाहरण देते हुए कहा है,
कि जिन लोगों को जीवन का आनंद लेने आता हैं वह लोग जीवन के किन्ही भी परिस्थिति में जीवन का आनंद ले ही लेते हैं वो दुख में भी जीवन खुशी से जीते हैं वो पिछली बातो को भुलाकर आज में जीना चाहते हैं ऐसे लोग वर्तमान में जीना ज्यादा पसंद करते हैं और बीती बातें को भुलाकर आज की खुशियां ढूंढते हैं, अर्थात कवि ने इस कविता में हमे जीवन जीने की शिक्षा दी है हमे बीती बातें को भुलाकर आज में जीना चाहिए, क्योंकि हर एक के जीवन पर अच्छे बुरे पल आते हैं दुख सुख का अनुभव हर किसी के जीवन में होता है और हमें उसकी शोक न करके हमेशा जीवन का आनंद लेनी चाहिए, तात्पर्य हर किसी ने अपने प्रिय वस्तु या प्राणी को खोया ही होगा , जैसे तारे के टूटने पर कभी अंबर शोक नही मनाता, फूलों के मुरझाने पर उपवन शोर नहीं मचाता, प्यालियों के टूटने से मदिरा शोक नहीं मनाता उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी बीती बातें पर शोक नही मानना चाहिए बल्कि जीवन में बचे हुए पलो का सुखपूर्वक आनंद लेनी चाहिए...!!
जो बीत गई सो बात गई
~ हरिवंश राय बच्चन~✍️...:)
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Very very nice
जवाब देंहटाएंबेहतरीन कविता👏👏👏
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